Tuesday, January 31, 2012

जीवन का आधार हो तुम...

इस जीवन का आधार हो तुम,
मुझमे जो भी अच्छा है, वो विचार हो तुम।
थाम कर उंगली तेरी, मैंने है चलना सीखा,
कन्धों पर तेरे बैठकर, मैंने है उड़ना सीखा,
तेरे भरोसे ही, दुनिया से लड़ना सीखा,
तुझे देखकर ही, खुद पर यकीन करना सीखा।
मेरी हर सफलता का सार हो तुम,
मुझमे जो भी अच्छा है, वो विचार हो तुम।

अपने दुःख में रात-रात जगाया है तुम्हे,
अपनी जिद की खातिर, कितना सताया है तुम्हे,
विचारों की लड़ाई में, आहत भी किया है तुम्हे,
ख्वाइशों की चाहत में, बाधित भी किया है तुम्हे।
पर सच एक और भी है कि,
मेरी हर चाहत का आधार हो तुम,
मुझमे जो भी अच्छा है, वो विचार हो तुम।

"जीवन संघर्ष है ", यही पाठ पडाया है मुझे,
झूठ-मूठ ही हार कर, जीतना सिखाया है मुझे।
मैं मजबूत हूँ क्योंकि मेरी नीवं में तुम हो मिले
यही पार्थना है ईश्वर से कि,
हर किसी को पिता आप सा मिले।