मैंने देखा है, रंग सपनो के बदलते हुए,
और पाने की चाहत में, अपने जज्बातों से लड़ते हुए,
नम आँखों के कोनो में, सिक्को की चमक पलते हुए,
सूरज सा चमकने की चाहत में, खुद के भीतर जलते हुए,
मैंने देखा है, रंग सपनो के बदलते हुए.
मुट्ठी भर आसमान ही चाहत थी जिनकी,
उन्ही लोगों को, दो गज जमीन के लिए लड़ते हुए,
आज में जीने वालों को, कल के लिए मरते हुए,
खवाइश लिए परिवार की, अपनों से अलग चलते हुए,
मैंने देखा है, रंग सपनो के बदलते हुए.
हर किसी को तारों को छूना है
हर किसी को सबसे उचा होना है
उच-नीच की इस लड़ाई में,
तारों तक पहुचने की पढाई में,
अपनों से झगड़ते हुए,
भावनाओ से खिलवाड़ करते हुए,
मैंने देखा है, रंग सपनो के बदलते हुए.
सुना है अक्सर मैंने भी,
कुछ पाने के लिए, कुछ खोना पड़ता है
स्वर्ग अगर हो जाना तो, मरना पड़ता ही है
अक्सर ऐसी आत्माओं को,
अपने जीवन के लिए लड़ते हुए,
नरक के रास्तों पर, बड़े कदमो से चलते हुए,
मैंने देखा है, रंग सपनो के बदलते हुए...
outstanding......too good
ReplyDeletereally nice piece of poetry..filled with pathos and really deep meaning..really liked it
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